सियासत कुछ नही रद्दो बदल का खेल है यारों।
किसी को बेल है यारों किसी को जेल है यारों ।
गुनाहों को सजाओं का भला अब खौफ कितना हो ।
कहां हो फैसला इसका अदालत फेल है यारों ।
अमीरी सो रही घर पर गरीबी रो रही दर पर।
मुक्कदर मुफलिसी का ये भयानक मेल है यारों।
यहां हर दिल मे रंजिश तो वहां हर दिल मे शाजिस है।
ये झूठी शान माचिस है अदावत तेल है यारों।
जमाने कितने बदले पर असल मसला वहीं पे है
कहां बिजली सड़क पानी कहां पर रेल है यारों
राजीव कुमार
किसी को बेल है यारों किसी को जेल है यारों ।
गुनाहों को सजाओं का भला अब खौफ कितना हो ।
कहां हो फैसला इसका अदालत फेल है यारों ।
अमीरी सो रही घर पर गरीबी रो रही दर पर।
मुक्कदर मुफलिसी का ये भयानक मेल है यारों।
यहां हर दिल मे रंजिश तो वहां हर दिल मे शाजिस है।
ये झूठी शान माचिस है अदावत तेल है यारों।
जमाने कितने बदले पर असल मसला वहीं पे है
कहां बिजली सड़क पानी कहां पर रेल है यारों
राजीव कुमार